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सोशल मीडिया पर निबंध

यह लेख सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त निबंध है। आज का युग सोशल मीडिया का युग है। Facebook, Instagram, Twitter जैसी Networking Sites का आज दुनिया भर के करोड़ों लोग इस्तेमाल करते है। सोशल मीडिया की तरफ दुनिया का आकर्षण स्वाभाविक है। विशेष तौर पर हमारी युवा पीढ़ी हमारे छात्र इन सोशल मीडिया वेबसाइट को लेकर ज्यादा उत्साहित रहते है।

सोशल मीडिया पर निबंध

एक अनुमान के मुताबिक फेसबुक को कुल 2.6 बिलियन लोग इस्तेमाल करते है। फेसबुक दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया वेबसाइट मानी जाती है। फ़रवरी २००४ को मार्क ज़ुकरबर्ग द्वारा फेसबुक की शरुवात की गयी थी। फेसबुक के बाद आज ट्विटर सबसे प्रसिद्ध सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों में से एक है। जिसकी स्थापना 21 मार्च 2006 को जैक डोर्सी द्वारा की गई थी। इंस्टाग्राम एक फोटो और वीडियो शेयरिंग वेबसाइट है। इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कुल 1 बिलियन से भी अधिक लोग करते है। यह केविन सिस्ट्रॉम और माइक क्राइगर द्वारा बनाया गया था।

हर टेक्नोलॉजी के कुछ फायदे और कुछ नुकसान होते है। उसी तरह सोशल मीडिया के फायदे भी है तो सोशल मीडिया के नुकसान भी है। इस लेख के माध्यम से में हम यह जानने का प्रयास करेंगे कि स्कूल और कॉलेज में छात्र के जीवन पर सोशल मीडिया का क्या प्रभाव पड़ता है।

सोशल मीडिया का छात्रों पर प्रभाव

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के 3.96 बिलियन लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते है। आज पूरी दुनिया का ६० प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा सोशल मीडिया पर व्यस्त है। और यह संख्या बढ़ती चली जा रही है। एक सर्वेक्षण के अनुसार हाई स्कूल के 72 प्रतिशत और कॉलेज के 78 प्रतिशत छात्र सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं।

सोशल मीडिया वेबसाइटों के अति प्रयोग से छात्रों के व्यक्तिगत और शैक्षणिक जीवन को भी नुकसान हो सकता है।

युवा अभिव्यक्ति और सोशल मीडिया

ऐसे कई कारण मौजूद हैं जो बताते हैं कि छात्रों को सोशल मीडिया में समय बिताना क्यों पसंद है। सबसे पहले सोशल मीडिया उन्हें स्वतंत्रता प्रदान करता है, जो वे चाहते हैं उसे अपलोड करने और जिसे वे चाहते हैं उससे बात करने के लिए। उन्हें नए दोस्त बनाना और खुल कर विचार रखना पसंद है। सोशल मीडिया उन्हें एक ऑनलाइन पहचान बनाने का मौका देता है।

सोशल मीडिया फायदे और नुकसान

सोशल मीडिया का शिक्षा पर कई सकारात्मक प्रभाव हैं, जिनमें लेकिन इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं जिनमें पहचान की चोरी, साइबर बदमाशी और सामाजिक अलगाव शामिल हैं। आइए सोशल मीडिया के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करें; शिक्षा पर इसके प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर पाने के लिए सकारात्मक और नकारात्मक दोनों।

छात्रों के जीवन मे सोशल मीडिया एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। एक तरफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कुछ सकारात्मकता को साझा करने के लिए किया जाता है। नए विचारों को व्यक्त करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए किया जाता है। सोशल मीडिया के सकारत्मक पहलु की बात करे तो इसमें बेहतर संचार, समय पर जानकारी, ऑनलाइन सामाजिककरण, सीखना, कौशल को बढ़ाना इत्यादि शामिल है।

तो वहीँ दूसरी तरफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कुछ नकारत्मक प्रभाव भी डालते है। इंटरनेट प्राइवेसी का हनन और साइबर क्राइम को बढ़ावा मिलता है। इंटरनेट पर आसानी से पोर्न उपलब्ध है जो बच्चों के व्यक्तित्व पर बुरा प्रभाव डालता है। आइये समझते है कैसे सोशल मीडिया छात्रों के जीवन पर नकारत्मक और सकारत्मक प्रभाव डालता है।

सकारत्मक प्रभाव

शिक्षा: सोशल मीडिया साइटों का उपयोग शैक्षिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। सोशल मीडिया मंच का उपयोग सूचना और ज्ञान साझा करने के लिए किया जा सकता है। सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी कम समय मे अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।

व्यापार: व्यापार के नजरिये से सोशल मीडिया वर्तमान समय मे एक वरदान साबित हुआ है। वेबसाइट , ब्लॉग या सोशल ग्रुप बना कर आप अपने सभी संभावित ग्राहकों को आसानी से लक्षित कर सकते हैं। पारंपरिक तरीकों के मुकाबले सोशल मीडिया अभी प्रभावशाली और सस्ता माध्यम है।

नयी सोच: सोशल मीडिया एक मंच प्रदान करता है जिसके द्वारा हम अपनी भावनाओं, विचारों और सुझावों को दुनिया के समक्ष प्रस्तुत कर सकते है। सोशल मीडिया हमे यह मौका देता है की हम अपनी बात नए तरीके से प्रस्तुत कर सके। चित्र, इन्फोग्राफिक्स या वीडियो जैसे आकर्षक तरीके अपना कर विचार प्रस्तुत किये जा सकते है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: अपने विचार, सुझाव या भावना व्यक्त करना अभिव्यक्ति कहलाती है। सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। सोशल मीडिया पर हमारी अभिव्यक्ति पर हमे प्रतिक्रिया भी हमे तुरंत मिल जाती है। सकारत्मक प्रतक्रिया से हम प्रोत्साहित होते है। कहीं हमारी जानकारी गलत है तो उसपर भी तुरंत सुधार संभव है।

जागरूकता: सोशल मीडिया के माध्यम से किसी विचार या मुद्दे पर जागरूकता पैदा करना आसान हो गया है। एक एप्लीकेशन के द्वारा पूरी दुनिया से संपर्क आसानी से हो जाता है। किसी भी विषय पर जागरूकता फैलना इतना सरल कभी नहीं था।

नकारात्मक प्रभाव

छात्र के जीवन पर सोशल मीडिया द्वारा नकारात्मक प्रभाव भी पड़ते हैं। यदि हम बिना सूझ बूझ के इन प्लेटफार्मों को अत्यधिक उपयोग करते हैं तो निश्चित रूप से परिणाम नकारत्मक होंगे।

बेवकूफी: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का का उपयोग समझदारी से करना जरुरी है। कुछ भी पोस्ट करने से पहले इस बात का ज्ञान होना जरुरी है की यह सामाग्री पोस्ट करने योग्य है भी या नहीं। युवा पीढ़ी अपरिपक्वता के चलते खुद को स्मार्ट दिखाने का प्रयास करते है। किन्तु कई बार उनके द्वारा पोस्ट की गयी सामग्री से वे बेवकूफ साबित होते है।

व्याकुलता: व्याकुलता छात्र के जीवन पर सोशल मीडिया के सबसे नकारात्मक प्रभावों में से एक है। अपना अधिक समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिताने वाले छात्र पोस्ट, शेयर और लाइक को लेकर अत्यधिक व्याकुल नजर आते है। इस प्रकार की व्याकुलता छात्रों के व्यक्तित्व को प्रभावित करती है।

समय की बर्बादी: छात्र जीवन मे यदि कोई सबसे कीमती चीज होती है तो वह छात्रों का समय होता है। किन्तु इस बात से अनजान कुछ छात्र अपना अधिक समय सोशल मीडिया पर व्यतीत करते है। समय का यह दुरूपयोग छात्रों के भविष्य के लिए घातक साबित होता है। समय बचाने के लिए बनाए ये स्मार्ट फ़ोन आज समय बर्बाद करने के प्रमुख उपकरण बन गए है।

डिप्रेशन: आज सोशल मीडिया एक व्यसन की तरह हो गया है। छोटी उम्र के यह छात्र आसानी से इस व्यसन के आधीन हो जाते है। देर रात तक इंटरनेट और सोशल मीडिया पर समय बिताना , सर्फिंग, चैटिंग की वजह इनका बाहरी दुनिया से जैसे संपर्क टूट सा गया है। इस प्रकार की परिस्थियाँ छात्रों मे अवसाद और डिप्रेशन को जन्म देती है।

स्वास्थ्य पर असर: लंबे समय तक इंटरनेट और मोबाइल फोन पर काम करने से आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। मोबाइल डिवाइस की स्क्रीन और लैपटॉप की स्क्रीन से उत्पन्न होनी वाली रोशनी आंखों को शुष्क करती है। बिना ब्रेक के लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना आपकी पीठ को कठोर बना सकता है, धीरे-धीरे, और तेजी से अगर ध्यान नहीं रखा गया तो दर्द और भी बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म दोस्तों, परिवार और समाज को जोड़ने का अच्छा मंच है। वैश्वीकरण के इस दौर मे जहाँ दुनिया सिमटती जा रही है वहां सोशल मीडिया को अनदेखा नहीं किया है। किन्त्य हमे इसका ध्यान रखना है की सोशल मीडिया का सीमित और उचित इस्तेमाल रहे।

उपरोक्त निबंध मे सोशल मीडिया पर दिए सकारत्मक और नकरत्मक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे सोशल नेटवर्किंग साइटों के उपयोग पर विशेष रूप से हाई स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए कुछ नियम बनाने आवश्यक है। लेकिन फिर भी छात्रों को उचित तरीके से सोशल मीडिया के लिए समय बिताने का विकल्प भी मिलना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना जरुरी है की यह उनके स्कूल या कॉलेज के प्रदर्शन में बाधा उत्पन न करे।

छात्रों को यह समझना अवश्यक है की सोशल नेटवर्किंग साइट्स आभासी दुनिया बनाती हैं जो वास्तविकता से काफी भिन्न होती हैं। छात्रों को समझदारी से यह निश्चित करना चाहिए की वे सोशल मीडिया पर कितना समय बिताना चाहते हैं।

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