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सोशल मीडिया के नुकसान 2022

आज सोशल मीडिया का युग है। Facebook, Instagram, Twitter और Snapchat कुछ प्रसिद्ध सोशल मीडिया एप्लीकेशन है। अपने फ़ोन पर एक एप्लीकेशन के द्वारा आप आज पूरी दुनिया के संपर्क मे है। एक दूसरे से संपर्क करना कभी इतना आसान नहीं था। जैसे की हर Technology के कुछ फायदे और कुछ नुकसान होते है , उसी तरह सोशल मीडिया के भी कुछ नुकसान है।

सोशल मीडिया की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित आज की युवा पीड़ी है। आज के इस लेख मे हम सोशल मीडिया के नुकसान पर बात करेंगे। विशेष तौर पर सोशल मीडिया के नुकसान हमारी युवा पीड़ी के सन्दर्भ मे।

सोशल मीडिया का युवाओं पर नकारत्मक प्रभाव

आज सोशल मीडिया ने युवा पीड़ी को एक नयी पहचान बनाने का मौका दिया है। युवा पीड़ी सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया से जुड़ा हुआ महसूस करती है। एक दूसरे से संपर्क करना हो, या दुनिया की खबरों पर नजर रखना हो , नयी तकनीक से जुड़ना हो, या ऑनलाइन पहचान बनानी हो सोशल मीडिया के माध्यम से यह सब सरल हो गया है। मनोरंजन, खबरे , संपर्क और संचार की दॄष्टि से सोशल मीडिया युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

किन्तु इसी के साथ सोशल मीडिया ने युवा पीड़ी पर कुछ नकारत्मक प्रभाव भी डाले है। इनमे से कुछ नकारत्मक प्रभाव इस प्रकार है :

अवास्तविक जीवन शैली

सोशल मीडिया युवाओं को कहीं न कहीं अवास्तविक जीवन शैली की तरफ मोड़ रहा है। सोशल अकाउंट वास्तविक जीवन से अधिक महत्वपूर्ण लगने लगे है। ख़ुशी यो या गम , दिन हो या रात , हर बात सोशल मीडिया के माध्यम से जाहिर करने की मानसिकता युवाओं को वास्तविक जीवन से दूर ले जा रही है।

ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार

युवा पीड़ी अत्यंत जोशीली और अपरिपक़्व होती है। इसी प्रकृति के कारण युवा ऑनलाइन अपनी व्यक्तिगत फोटो, व्यक्तिगत भावनाएं, संवेदनशील जानकारियां शेयर करते है। जिसके कारण उन्हें ऑनलाइन धोकेबाजी का शिकार तक होना पड़ता है। कई बार इसके परिणाम भीषण होते है।

डिप्रेशन के शिकार

अधिक सोशल मीडिया का उपयोग युवाओं को डिप्रेशन की तरफ ले जा रहा है। कितने शेयर, कितने लाइक्स की चिंता युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित करती है। ऑनलाइन ट्रोलिंग आजकल एक आम बात हो गयी है। ट्रोलिंग के चलते कितने युवा डिप्रेशन और तनाव का शिकार हो रहे है।

नींद की कमी

दिन भर ऑनलाइन बने रहने की होड़, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी पहचान मजबूत करने की होड़, ज्यादा से ज्यादा लाइक मिले, शेयर मिले इसी गणिंत मे आज की युवा पीड़ी उलझी रहती है। रात रात तक ऑनलाइन बने रहना, बात बात पर स्मार्ट फ़ोन उठा लेना, ऑनलाइन शेयर करना जैसी प्रवृति बच्चो को मानसिक रूप से कमजोर कर रही है।

कमजोर व्यक्तित्व

सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से युवा पीड़ी अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण कामों को धायनपूर्वक नहीं कर पा रही है। उनके विचारों की अधिकतर क्षमता ऑनलाइन पहचान को मजबूत करने मे लग रही है। जिसकारण उनका सम्पूर्ण व्यक्तित्व नहीं बन पा रहा है।

जितनी मात्रा मे युवा सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे है उसी अनुपात मे उनपर ये नकारत्मक प्रभाव पड़ रहे है।

साल 2019 मे अमेरिका मे 12 साल से 15 साल की उम्र के 6000 से भी अधिक बच्चों पर एक शोध किया गया था। इस शोध के परिणाम के अनुसार जो बच्चे दिन मे 3 घंटे से अधिक सोशल मीडिया का उपयोग करते है उनकी मानसिक क्षमता कमजोर होती है।

इसी साल इंग्लैंड मे भी 13 से 16 साल के बच्चों पर एक शोध किया गया था। इस शोध का भी परिणाम यही संकेत देता है की दिन मे तीन बार से ज्यादा सोशल मीडिया पर समय देने वाले बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो रहे है।

युवा अभिव्यक्ति और सोशल मीडिया

अभिव्यक्ति का अर्थ है की आप अपने विचारों को सबके सामने प्रस्तुत कर सके। यह अभिव्यक्ति शब्दों के द्वारा, कला के द्वारा या चित्र या संगीत के द्वारा व्यक्त की जा सकती है। सोशल मीडिया के कारण आज की युवा पीड़ी पहले से अधिक बेहतर ढंग से खुद को व्यक्त कर पा रही है। कला की अभिव्यक्ति हो, या विचारों की, या फिर अपनी भावनाओं को व्यक्त करना हो युवा पीड़ी सोशलमीडिया का सहारा ले रही है।

साल 2020 मे इंस्टिट्यूट ऑफ़ गवर्नेंस पॉलिसीस एंड पॉलिटिक्स (IGPP) ने युथ ऑनलाइन लर्निंग आर्गेनाईजेशन (YOLO) & सोशल मीडिया मैटर्स (SMM) संस्थान सहायता से एक सर्वे किया था। इस सर्वे का मुख्य उद्देस्य आज की युवा पीड़ी मे इंटरनेट के उपयोग के पैटर्न को समझना था।

इस सर्वे के माध्यम से युवा पीड़ी मे इंटरनेट को लेकर जानकारी , इंटरनेट इस्तेमाल से जुड़े विषय, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता और ऑनलाइन फ्रॉड को समझने की क्षमता से जुड़े प्रश्न जुड़े थे। सर्वे के कुछ महत्वपूर्ण परिणाम इस प्रकार है:

1. सर्वे मे शामिल 85% युवक जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है स्मार्ट फ़ोन का इस्तेमाल करते है।

2. इस 85% युवकों मे अधिकतर दिन मे 5 घंटे से ज्यादा समय इंटरनेट पर गुजरते है।

3. कुल 80% से भी ज्यादा बच्चे सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर का उपयोग करते है।

4. Youtube की अपेक्षा युवा OTT प्लेटफॉर्म पर वीडियो देखना पसंद करते है।

5. इंटरनेट प्राइवेसी और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी के मामलों मे कमी देखी गयी।

6. तकरीबन 30% सहभागियों ने माना की उन्होंने संवेदनशील जानकारिया ऑनलाइन साझा की है।

7. कुल 50% बच्चों ने स्वीकारा की उन्होंने इंटरनेट का उपयोग पोर्न वीडियो देखने के लिए किया है।

8. सर्वे मे शामिल अधिक बच्चों ने कहा की वे इंटरनेट का उपयोग दोस्तों से बात करने और सोशल मीडिया के लिए करते है।

9. 20% ने माना की वे इंटरनेट का उपयोग जानकारी बढ़ाने और शिक्षा सम्बंधित विषयों के लिए करते है।

सर्वे का निष्कर्ष रहा की बच्चों मे इंटरनेट पर प्राइवेसी और सुरक्षा सम्बंधित जागरूकता की कमी है। जिसकी वजह से वे साइबर क्राइम का शिकार बन सकते है। अभिभावकों की जिम्मेदारी है की वे बच्चों को इंटरनेट का सही इस्तेमाल समझाएं और उनकी इंटरनेट सम्बंधित गतिविधियों पर नजर रखे। सोशल मीडिया के बहार एक दुनिया है।

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